Wednesday, 11 December 2019

पंचायती राज - छत्तीसगढ़

- ग्राम पंचायत -


* संरचना -

- त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था
- राज्यपाल अधिसूचना जारी करके किसी गाँव या गाँव के समूहों को ग्राम घोषित करेगा।
- राज्यपाल जिसे भी ग्राम घोषित करेगा, उस ग्राम की अपनी एक ग्राम पंचायत होगी।
- राज्यपाल अधिसूचना जारी करके किसी राज्य को विभिन्न जिलों में विभाजित करेगा और प्रत्येक जिले की अपनी एक जिला पंचायत होगी।
- प्रत्येक गाँव की अपनी एक ग्रामसभा होगी और वह ग्रामसभा जिस भी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आती है वह उस ग्राम पंचायत के कार्यों का निरीक्षण भी करेगी। बिना ग्रामसभा की स्वीकृति के ग्राम पंचायत कोई कार्य नहीं कर सकती।
- ग्रामसभा में उस ग्राम के सभी लोग शामिल होते हैं जिनका नाम उस ग्रामसभा की मतदाता सूची में सम्मिलित हो।


* ग्राम पंचायत का वार्ड में विभाजन -
(न्यूनतम वार्ड - 10, अधिकतम वार्ड - 20)
- प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 10 वार्ड होंगे परंतु जिस ग्राम पंचायत की जनसंख्या 1000 से अधिक है उस ग्राम पंचायत को अधिकतम 20 वार्ड में भी बांटा जा सकता है।
- ग्राम पंचायत के वार्डों का विभाजन कलेक्टर के द्वारा किया जाएगा। सभी वार्डों की जनसंख्या लगभग एक समान होनी चाहिए।

* ग्राम पंचायत का गठन -
- प्रत्येक ग्राम पंचायत निर्वाचित पंच से मिलकर बनेगी।
- प्रत्येक वार्ड से एक पंच निर्वाचित होगा। जिसके लिए उस वार्ड की मतदाता सूची में सम्मिलित मतदाता ही वोट करेंगे। अतः पंच प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होता है।
- पंचों के निर्वाचन के पश्चात सभी निर्वाचित पंच अपने बीच में से किसी एक पंच को सरपंच बनाएंगे तथा किसी एक पंच को उपसरपंच बनाएंगे‌।
- यदि जनता किसी कारणवश किसी वार्ड के पंचों को निर्वचित नहीं करती या उस वार्ड में चुनाव नहीं हो पाते तो इस कारण से आगे की कार्यवाहियां नहीं रोकी जाएगी।
- अगर किसी वार्ड की जनता अपने वार्ड से किसी पंच का चुनाव नहीं करती तो वहां माह के भीतर पुनः चुनाव करवाए जाएंगे। अगर वहां किसी कारणवश पुनः पंच का चुनाव नहीं हो पाता तो उस वार्ड में तब तक चुनाव नहीं कराया जाएगा जब तक राज्य निर्वाचन आयोग को ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि वहां फिर से चुनाव कराए जा सकते हैं।


* ग्राम पंचायत में आरक्षण -

* पंच पद के लिए आरक्षण - 
- प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचों के लिए पदों को अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए उनकी संख्या के आधार पर आरक्षित रखे जाएंगे।
- किसी ग्राम पंचायत में जितने % जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की होगी कुल पदों के उतने पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होंगे।
- उस ग्राम पंचायत में जितने % जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की होगी, कुल पदों के उतने % पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होंगे।
- अगर अनुसूचित जाति व जनजाति को दिया गया कुल आरक्षण 50% या उससे कम हो तो कुल पदों के 25% पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रखे जाएंगे।
- कुल आरक्षित सीटों का 50% सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी एवं कुल सीटों की भी 50% सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी।
- कौन सा वार्ड किसके लिए आरक्षित होगा इसका निर्णय कलेक्टर के द्वारा लाटरी निकालकर किया जाएगा।
- एक बार लाॅटरी निकालने पर दो सामान्य निर्वाचन तक यह वार्ड आरक्षित कर दिया जाएगा (10 वर्ष तक) परंतु महिलाओं के लिए किए गये आरक्षण एक सामान्य निर्वाचन की अवधि के बाद बदल दिए जाएंगे‌।


* सरपंच पद के लिए आरक्षण -
- प्रत्येक ग्राम पंचायत में सरपंच के पद ST, SC व OBC के लिए आरक्षित किए जाएंगे। जनपद पंचायत में उनकी जनसंख्या के आधार पर पदों को आरक्षित किया जाएगा। किसी जनपद के भीतर जितनी प्रतिशत संख्या SC की होगी उतने प्रतिशत सरपंच के पद SC के लिए आरक्षित होंगे। जितनी जनसंख्या ST की होगी उतने % पद ST के लिए आरक्षित होंगे। अगर यह आरक्षण 50% या उससे कम है तो OBC के लिए 25% पद आरक्षित होंगे।
- आरक्षित किए गये स्थानों का 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित होगा एवं कुल पदों का भी 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित होगा।
- कौन सी ग्राम पंचायत के सरपंच का पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा इसका निर्णय कलेक्टर द्वारा लाॅटरी निकालकर होगा। आरक्षण की यह अवधि 2 सामान्य निर्वाचन की अवधि के बराबर होगी। जबकि महिलाओं के लिए अवधि एक सामान्य निर्वाचन की अवधि के बराबर होगी‌‌।

* सरपंच और उपसरपंच का निर्वाचन -

- तहसीलदार पंचों के निर्वाचन के पश्चात जल्द से जल्द सरपंच और उपसरपंच के निर्वाचन के‌ लिए पंचायत का सम्मेलन बुलाएगा और उस सम्मेलन में सभी निर्वाचित पंच अपने बीच में से एक सरपंच और उपसरपंच चुनेंगे। अत: सरपंच और उपसरपंच का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रुप से होता है।
- यदि सरपंच का पद में कोई व्यक्ति ST, SC या OBC वर्ग का नहीं आया है तो उपसरपंच ST, SC या OBC का ही होगा।

* नामों का प्रकाशन -

- उपखण्ड अधिकारी( सब डिवीजनल आफिसर) सरपंच और उपसरपंच के निर्वाचन के पश्चात् उनके नामों का प्रकाशन करेगा।

* पंचायत का प्रथम सम्मेलन -
- ग्राम पंचायत का सचिव नामों के प्रकाशन की तिथि से 30 दिन के भीतर पंचायत का ‌प्रथम सम्मेलन बुलाएगा और इस प्रथम सम्मेलन की तारीख से ही पंचायत का कार्यकाल प्रारंभ माना जाएगा और पंचायत के सभी पदधारी इसी तारीख से 5 वर्ष के लिए पद धारण करेंगे।
- अगर कोई ग्राम पंचायत अपने कार्यकाल को पूर्ण करने से पहले ही विघटित हो जाती है तो 6 माह के भीतर नये निर्वाचन की कार्यवाहियां पूरी की जाएगी। इस तरह निर्वाचित किए गये नये ग्राम पंचायत का कार्यकाल उतना ही होगा जितना पुरानी ग्राम पंचायत का बचा है।

‍‌‌‌# ग्राम पंचायत के कार्यकाल की गणना उसके प्रथम सम्मेलन से ही की जाती है।
उदाहरण - अगर प्रथम सम्मेलन 20 जून 2018 है, तो कार्यकाल 20 जून 2023 तक रहेगा। और यदि पंचायत का विघटन 20 जून 2020 में होता है तो भी नयी सरकार 20 जून 2023 तक ही रहेगी न कि अगले चुनाव ( विघटन के पश्चात) से 5 वर्ष तक।


* ग्राम पंचायत का विघटन - 
- यदि किसी भी समय राज्य सरकार या संचालक पंचायत को ऐसा प्रतीत होता है कि पंचायत अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर रही है या राज्य सरकार द्वारा दिए गये निर्देशों को नहीं मान रही है या पंचायत अपनी शक्तियों का दुरूपयोग कर रही है तो जाँच के पश्चात् उस पंचायत को विघटित किया जा सकता है।
- पंचायत के विघटित होते ही 6 माह के भीतर वहाँ चुनाव करवाये जाएंगे परंतु पंचायत का कार्यकाल खत्म होने में 6 माह या उससे कम समय बचा है तो और पंचायत विघटित की जा रही है तब वहां और चुनाव नहीं करवाए जाएंगे।
- ऐसी स्थिति में 6 माह की अवधि के लिए पंचायत के कामकाज को देखने के लिए एक प्रशासनिक समिति गठित की जाएगी। इस प्रशासनिक समिति में ग्राम पंचायत के वे सदस्य शामिल होंगे जो उस पंचायत के विघटन के समय उस पंचायत के पंच, उपसरपंच और सरपंच थे।
- इस प्रशासनिक समिति का सभापति सरपंच ही होगा एवं उपसरपंच इसका उपसभापति होगा एवं बाकी पंच इस समिति के सदस्य होंगे।

- इस प्रशासनिक समिति को ग्राम पंचायत के एक स्थायी समिति के अनुरूप बराबर माना जाएगा एवं इस प्रशासनिक समिति के पास वही शक्तियाँ होंगी जो कि एक ग्राम पंचायत के पास थी। परंतु इस शक्तियों का प्रयोग राज्य सरकार की सलाह पर ही किया जाएगा।


* सरपंच और उपसरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव -
- अगर ग्राम पंचायत के निर्वाचित पंच, सरपंच या उपसरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं तो सर्वप्रथम उस पंचायत के तात्कालिन समय में निर्वाचित पंच के 1/3 पंच उपखंड अधिकारी राजस्व से लिखित मांग करेंगे।
- उपखण्ड अधिकारी राजस्व प्रस्ताव मिलते ही प्रस्ताव देने आए सदस्यों को पावती देगा जिसमें प्रस्ताव मिलने की तारीख लिखी होगी। और इसी तारीख से 15 दिन के भीतर पंचायत का एक विशेष सम्मेलन बुलाया जाएगा।
- सम्मेलन किस तारीख को होगा इसकी सूचना सम्मेलन से 7 दिन पूर्व ग्राम पंचायत के सचिव को भेजी जाएगी।
- इस सम्मेलन की अध्यक्षता नायब तहसीलदार पद श्रेणी से अनिम्न पद श्रेणी का व्यक्ति करेगा‌।
- सम्मेलन ‌की शुरूआत में अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति इस प्रस्ताव के
पक्ष में रहने वाले किसी‌‌ एक पंच को खड़े होकर इस प्रस्ताव को सुनाने के लिए बोलेगा और इसके पश्चात् मतदान की प्रक्रिया होगी।
# सरपंच या उपसरपंच को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
- यह मतदान एक गुप्त मतदान होगा। अगर उस मतदान में उपस्थित व मत देने वाले सदस्यों का 3/4 से ज्यादा होता है और यह संख्या तत्समय पंचायत का गठन करने वाले सदस्यों के 2/3 से अधिक हो तो यह अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाएगा।

# उपस्थित व मत देने वाले का 3/4 बहुमत > तत्समय कुल सदस्यों का 2/3 बहुमत 

# सरपंच या उपसरपंच को सम्मेलन में हिस्सा लेने का अधिकार होगा वह अपना पक्ष भी रखेंगे और वोट भी देंगे।


* अविश्वास प्रस्ताव कब नहीं लाया जा सकता -
- जब सरपंच या उपसरपंच अपना पद ग्रहण करते हैं और उसे पद ग्रहण किए हुए‌ 1 वर्ष का समय नहीं हुआ है तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
- सरपंच या उपसरपंच के कार्यालय के अंतिम 6 माह में यह प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
- वह तारीख जिसमें पिछला अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था उस तारीख से 1 वर्ष के भीतर पुन: अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
- अगर अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है और सरपंच या उपसरपंच उसे चुनौती देना चाहते हैं तो जिस तारीख से यह प्रस्ताव पारित हुआ है उस तारीख से 7 दिन के भीतर वह कलेक्टर के पास अपील करेगा और कलेक्टर अपील प्राप्त होने के तारीख से 30 दिन के भीतर निर्णय लेगा जो कि अंतिम निर्णय होगा।


* सरपंच को वापस बुलाने की प्रक्रिया, प्रत्यावर्तन (Recall) -
अगर किसी ग्राम पंचायत के सरपंच के खिलाफ प्रत्यावर्तन की क्रिया आरंभ करनी है तो सर्वप्रथम उस ग्राम पंचायत के भीतर ग्रामसभा का गठन करने वाले कुल मतदाताओं के 1/3 मतदाता उपखण्ड अधिकारी राजस्व से लिखित हस्ताक्षर की माँग करेंगे। माँग प्राप्त होते ही उपखण्ड अधिकारी राजस्व इस प्रस्ताव को राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेगा। परंतु उपखण्ड अधिकारी राजस्व को यह प्रस्ताव प्राप्त होते ही उस तारीख से जिस तारीख को यह प्रस्ताव मिला है उसके 30 दिन के भीतर राज्य निर्वाचन आयोग को यह प्रस्ताव भेजना पड़ेगा।
- राज्य निर्वाचन आयोग प्रस्ताव प्राप्त होते ही जल्द से जल्द उस ग्राम पंचायत में चुनाव करवाने की तारीख तय करेगा।
- अगर उस मतदान में ग्राम पंचायत के भीतर ग्रामसभा का गठन करने वाले कुल मतदाताओं का आधे से अधिक बहुमत सरपंच के खिलाफ होता है तो सरपंच को अपना पद छोड़ना पड़ेगा। यह मतदान भी गुप्त मतदान होगा।

* प्रत्यावर्तन (Recall) कब कब किया जा सकता है :-
- सरपंच के खिलाफ यह प्रक्रिया तब तक प्रारंभ नहीं की जा सकती जब तक उसके कार्यकाल का आधा (ढाई वर्ष) पूर्ण न हो जाए।
- अगर किसी सरपंच के खिलाफ प्रत्यावर्तन की क्रिया पूर्ण हो जाती है और उसे पद से हटा दिया जाता है तो उपचुनाव के बाद नए निर्वाचित सरपंच के खिलाफ यह प्रक्रिया तब तक प्रारंभ नहीं की जा सकती जब तक उसके कार्यकाल की आधी अवधि पूर्ण न हो जाए।
- अगर किसी सरपंच के खिलाफ यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो प्रस्ताव पारित होने के 7 दिन के भीतर वह कलेक्टर के पास अपील कर सकता है।
- कलेक्टर अपील प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर निर्णय लेगा जो कि अंतिम होगा‌।

* पंच को वापस बुलाने की प्रक्रिया :-
- अगर किसी ग्राम पंचायत के किसी वार्ड के पंच के खिलाफ प्रत्यावर्तन की क्रिया आरंभ करनी है तो सर्वप्रथम वह पंच जिस वार्ड का हो, उस वार्ड के कुल मतदाताओं का 1/3 मतदाता द्वारा लिखित मांग हस्ताक्षर सहित उपखण्ड अधिकारी राजस्व इस प्रस्ताव को राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेगा। परंतु उपखण्ड अधिकारी राजस्व को यह प्रस्ताव जिस तारीख को यह प्रस्ताव प्राप्त हुआ है उसके 30 दिन के भीतर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजना पड़ेगा।
- प्रस्ताव प्राप्त होते ही राज्य निर्वाचन आयोग जल्द से जल्द उस ग्राम पंचायत के वार्ड में चुनाव कराने की तारीख तय करेगा।
- अगर मतदान में उस वार्ड के कुल मतदाताओं के आधे से अधिक मतदाता उस पंच के खिलाफ अपना वोट देते हैं तो उसे अपना पद त्यागना पड़ेगा।
# पंच के खिलाफ यह प्रक्रिया तब तक प्रारंभ नहीं किया जा सकता जब तक उसके कार्यकाल का 2.5 वर्ष पूर्ण न हो जाए।
- अगर किसी पंच के खिलाफ प्रत्यावर्तन की क्रिया पूर्ण हो जाती है और उसे पद से हटा दिया जाता है तो उपचुनाव के पश्चात नये पंच के खिलाफ यह प्रक्रिया तब तक प्रारंभ नहीं किया जा सकता जब तक उसके कार्यकाल की आधी अवधि पूर्ण न हो जाए।
- अगर किसी पंच के खिलाफ प्रत्यावर्तन पारित हो जाता है तो वह प्रस्ताव पारित होने के 7 दिन के भीतर वह कलेक्टर के‌ पास अपील कर सकता है।
- कलेक्टर अपील प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर निर्णय लेगा जो कि अंतिम होगा।

* आकस्मिक रिक्तियों का भरा जाना -
- अगर किसी ग्राम पंचायत का सरपंच का पद उसकी मृत्यु, त्यागपत्र, अविश्वास प्रस्ताव, प्रत्यावर्तन, पद से निलंबित करना या वह विधान सभा का विधायक या संसद सदस्य बन जाता है तो वह पद आकस्मिक रूप से रिक्त हो जाएगा।
- जब उसका पद आकस्मिक रूप से रिक्त घोषित होगा। ग्राम पंचायत का सचिव 15 दिन के भीतर ग्राम पंचायत का विशेष सम्मेलन बुलाएगा और उस सम्मेलन में निर्वाचित पंच अपने बीच में से किसी एक पंच को अस्थाई रूप से सरपंच का कार्यभार सौंपेंगे। ऐसे सरपंच को ही स्थानापन्न सरपंच कहा जाता है।
- यह स्थानापन्न सरपंच अपने पद पर तब तक बना रहेगा जब तक नये सरपंच का निर्वाचन नहीं हो जाता।
- इस स्थानापन्न सरपंच के पास वह सभी शक्तियाँ होगी जो सरपंच के पास होती है। अगर सरपंच का पद ST, SC, OBC के लिए आरक्षित किया गया है तो स्थानापन्न सरपंच उसी वर्ग का होना चाहिए।
- अगर सरपंच का पद ST, SC, OBC वर्ग की किसी महिला के लिए आरक्षित था तो उसी वर्ग की महिला ही स्थानापन्न सरपंच बनेगी। अगर उस वर्ग की कोई महिला नहीं है तो अन्य आरक्षित वर्ग की महिला को स्थानापन्न सरपंच निर्वाचित किया जाएगा। अगर किसी आरक्षित वर्ग की भी महिला नहीं है तो किसी अनारक्षित वर्ग की महिला को स्थानापन्न सरपंच नियुक्त किया जाएगा।
- अगर किसी पंच की आकस्मिक रिक्ति हो जाती है तो उस पंच का कार्य ग्राम पंचायत द्वारा देखा जाएगा और जब तक निर्वाचन नहीं हो जाता तब तक उसका पद खाली रहेगा।


- जनपद पंचायत -


जनपद पंचायत की संरचना -
* प्रत्येक जनपद पंचायत निम्न से मिलकर बनेगी -
- निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचित सदस्य (वार्ड)
- राज्य विधानसभा के ऐसे सदस्य जिनका निर्वाचन क्षेत्र उस जनपद पंचायत में आता हो और वह क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र हो तो वह विधायक जनपद पंचायत का सदस्य बनेगा जो कि एक पदेन सदस्य है।
- जनपद पंचायत के भीतर आने वाली ग्राम पंचायत के सरपंच भी जनपद पंचायत के पदेन सदस्य होंगे। परंतु उस जनपद पंचायत में आने वाले कुल सरपंचों के 20% (1/5) सरपंच लाॅटरी द्वारा एक-एक वर्ष के लिए जनपद पंचायत के सदस्य बनेंगे।

# एक बार जो सरपंच जनपद पंचायत का सदस्य बन जाता है तो वह उस जनपद पंचायत की सामान्य अवधि में दुबारा उसका सदस्य नहीं बन सकता।

* जनपद पंचायत का वार्डों में विभाजन -
( न्यूनतम- 10 वार्ड , अधिकतम - 25 वार्ड )
- राज्य सरकार कलेक्टर के माध्यम से अधिसूचना जारी करके किसी टजनपद पंचायत को वार्डों में विभाजित करेगी। किसी जनपद पंचायत में न्यूनतम 10 वार्ड होंगे परंतु जिस जनपद की जनसंख्या 50000 से अधिक है तो वहाँ अधिकतम 25 वार्ड हो सकते हैं।
- वार्डों का विभाजन इस प्रकार किया जाएगा कि प्रत्येक वार्ड की जनसंख्या लगभग एक समान हो।
- प्रत्येक वार्ड एक सदस्यीय वार्ड होगा। अगर कोई वार्ड किसी सदस्य का निर्वाचन नहीं करता तो उस सदस्य का निर्वाचन लंबित होने के कारण आगे की कार्यवाई रोकी नहीं जाएगी। वहाँ 6 महीने के भीतर पुन: चुनाव करवाए जाएंगे अगर फिर वह सदस्य का निर्वाचन नहीं होता तो वहां तब तक चुनाव नहीं करवाए जाएंगे जब तक राज्य निर्वाचन आयोग को ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वहाँ चुनाव करवाए जाएं।

* वार्डों में आरक्षण -
- प्रत्येक जनपद पंचायत में निर्वाचित सदस्यों का पद SC, ST या OBC के लिए आरक्षित होगा। जनपद पंचायत में उनकी जनसंख्या के आधार पर पदों का आरक्षण किया जाएगा। किसी जनपद के अंदर जितनी प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति की होगी उतना प्रतिशत आरक्षण अनुसूचित जाति का होगा तथा जितनी प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की होगी उतना प्रतिशत आरक्षण अनुसूचित जनजाति का होगा। अगर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 50% या उससे कम हो तो अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 25% आरक्षण होगा।
- आरक्षित किए गये स्थानों का 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित होगा तथा कुल पदों का भी 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित होगा।
- कौन से वार्ड का सदस्य कौन से वर्ग के लिए आरक्षित होगा इसका निर्णय कलेक्टर द्वारा लाॅटरी निकालकर किया जाएगा।
- आरक्षण की यह अवधि दो सामान्य निर्वाचन की अवधि के बराबर तथा महिलाओं के लिए तीन सामान्य निर्वाचन की अवधि के बराबर होगी।

* जनपद पंचायत के अध्यक्ष का आरक्षण -
- अगर अध्यक्ष का पद ST, SC, OBC के लिए आरक्षित नहीं है तो उपाध्यक्ष उसी वर्ग का होना चाहिए।
- अध्यक्ष पद के लिए जिला पंचायत में उनकी जनसंख्या के आधार पर पदों का आरक्षण किया जाएगा। किसी जनपद पंचायत में जितनी प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति या जनजाति का होगा उतना प्रतिशत पदों का आरक्षण अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षित होगा‌।
- अध्यक्ष का पद जिसका होगा इसका निर्णय कलेक्टर द्वारा लाॅटरी निकालकर किया जाएगा। यह आरक्षण की अवधि दो सामान्य दो सामान्य निर्वाचन की अवधि तथा महिलाओं के लिए यह 1 सामान्य निर्वाचन अवधि के बराबर होगी।

* अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के निर्वाचन के लिए सम्मेलन -
- उपखण्ड अधिकारी राजस्व सदस्यों का निर्वाचन होते ही जल्द से जल्द जनपद पंचायत का एक सम्मेलन बुलाएगा और इस सम्मेलन में जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्य अपने बीच में से ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन करेंगे।

* नामों का प्रकाशन -
- सदस्य, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन के पश्चात् जिला उपसंचालक/जिला संयुक्त संचालक इन सदस्यों के नामों का प्रकाशन करेगा।

* जनपद पंचायत का प्रथम सम्मेलन -
- नामों के प्रकाशन होते ही 30 दिनों के भीतर जनपद पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत का सम्मेलन बुलाएगा और इस प्रथम सम्मेलन की तारीख से वह जनपद पंचायत 5 वर्ष के कार्यकाल के लिए बनेगी। ( अगर विवाहित न हो जाए)
- अगर जनपद पंचायत समय से पहले विवाहित हो जाती है तो नई जनपद पंचायत उतने दिन के लिए ही कार्य करेगी जितना पूर्व जनपद पंचायत का बचा था।

# अगर जनपद पंचायत विघटित हो जाती है तो नई जनपद पंचायत का चुनाव 6 माह के भीतर किया जाएगा।

* जनपद पंचायत का विघटन -
- अगर जनपद पंचायत अपने कार्यों को ठीक से नहीं करती या सरकार के आदेशों का पालन नहीं करती तो राज्य सरकार या संचालक पंचायत जाँच के पश्चात जनपद पंचायत को विघटित कर सकता है। इस विघटन के समय पर एक प्रशासनिक समिति कार्य करेगी। उस प्रशासनिक समिति के सदस्य वही होंगे जो जनपद पंचायत के विघटन के समय सदस्य थे।

# जनपद पंचायत के पदेन सदस्य भी इस प्रशासनिक समिति में भाग लेंगे‌।


* जनपद पंचायत के अध्यक्ष उपाध्यक्ष के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव -
- जनपद पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष किसी के भी खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना हो तो उस जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्यों के 1/3 सदस्य कलेक्टर से लिखित मांग करेंगे।
- कलेक्टर मांग प्राप्त होते ही उन सदस्यों को एक पावती देगा जिसमें मांग प्राप्त होने की तारीख लिखी होगी और उसी तारीख से 15 दिन के भीतर कलेक्टर द्वारा जनपद पंचायत का विशेष सम्मेलन बुलाया जाएगा।
- सम्मेलन की तारीख से 7 दिन पूर्व इसकी तुलना जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेजी जाएगी। और वह इस सूचना को जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्यों को भेजेगा।
- इस सम्मेलन की अध्यक्षता कौन करेगा इसका निर्णय कलेक्टर करेगा और सम्मेलन के 3 दिन पूर्व उसकी सूचना जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को देगा। इस सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति डिप्टी कलेक्टर से निम्न श्रेणी पद का व्यक्ति होगा।
- सम्मेलन के दिन अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति किसी एक निर्वाचित सदस्य को इस प्रस्ताव के पक्ष में बोलने को कहेगा और इसके पश्चात अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
- होने वाला मतदान गुप्त मतदान होगा।
- अगर उपस्थित और मत देने वाले 3/4 सदस्यों का बहुमत तत्समय जनपद पंचायत का गठन करने वाले कुल निर्वाचित सदस्यों के 2/3 से अधिक हो तो अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को अपना पद छोड़ना पड़ेगा।


* अविश्वास प्रस्ताव कब लाया जा सकता है -
- उस तारीख से जिस तारीख को अध्यक्ष या उपाध्यक्ष ने अपना पद ग्रहण किया है उसके 1 वर्ष के भीतर यह प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
- अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के कार्यकाल के अंतिम 6 माह में यह प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
- उस तारीख को जिसमें पिछला अविश्वास प्रस्ताव नामंजूर किया गया था उसके 1 वर्ष के भीतर पुनः अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।

* अपील कहाँ की जा सकती है -
- अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के विरूद्ध यह प्रस्ताव पारित होने पर प्रस्ताव पारित होने के 10 दिन के भीतर यह अपील सहायक पंचायत के पास की जा सकती है।
- संचालक पंचायत अपील प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर निर्णय लेगा जो कि अंतिम होगा।




- जिला पंचायत -


संरचना -
जिला पंचायत निम्न से मिलकर बनेगी -
- निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचित सदस्य (10-35)
- लोकसभा के समस्त ऐसे सदस्य जिनका निर्वाचन क्षेत्र उस जिला पंचायत के भीतर पड़ता है, और जिनका क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र (पूर्णत:/अंशत:) वह उस जिला पंचायत के सदस्य होंगे‌।
- राज्यसभा के समस्त ऐसे सांसद जो कि उस राज्य में रहते हों और वह उस राज्य की ही किसी राज्यसभा सीट में निर्वाचित हुआ हो तो उनका नाम जिस भी जिले की मतदाता सूची में होगा वह उस जिला पंचायत का सदस्य होगा।
- राज्य विधानसभा के समस्त ऐसे सदस्य (विधायक) जिनका निर्वाचन क्षेत्र उस जिला पंचायत में पड़ता हो तो वह विधायक जिला पंचायत का सदस्य होगा। (पूर्णत:/अंशत:)
- उस जिला पंचायत के भीतर पड़ने वाली समस्त जनपद पंचायत के अध्यक्ष सीधे उस जिले पंचायत के सदस्य भी होंगे।
- अगर कोई निर्वाचन क्षेत्र किसी सदस्य का चुनाव नहीं करता है तो इससे अध्यक्ष उपाध्यक्ष की निर्वाचन प्रक्रिया बाधित नहीं होगी। 6 माह के भीतर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा वहाँ पुनः निर्वाचन कराए जाएंगे। और अगर फिर जनता उनका चुनाव नहीं करती तो वहाँ तब तक चुनाव नहीं होंगे जब तक राज्य निर्वाचन आयोग को ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वहाँ चुनाव कराए जाएंगे।

* जिले का निर्वाचन क्षेत्रों(वार्ड) में विभाजन -
- प्रत्येक जिला पंचायत को राज्य सरकार अधिसूचना जारी करके विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित करेंगी। अगर किसी जिले की जनसंख्या 5 लाख से कम है तो उस जिला पंचायत में न्यूनतम 10 वार्ड होंगे परंतु जिले की जनसंख्या 5 लाख से अधिक है तो उस जिला पंचायत में अधिकतम 35 वार्ड हो सकते हैं।

* निर्वाचन क्षेत्रों में आरक्षण (वार्डों में) -
- किसी जिला पंचायत में SC व ST के लिए पद आरक्षण रखे जाएंगे। जिस जिले में SC की जितनी जनसंख्या होगी उतने प्रतिशत सीट SC के लिए आरक्षित होगी तथा जिले में ST की जितनी जनसंख्या होगी उतने प्रतिशत सीट ST के लिए आरक्षित होगी। अगर ST और SC को दिया गया आरक्षण 50% या उससे कम हो तो OBC के लिए 25% सीट आरक्षित होगा।
- कुल निर्वाचित सीटों की 50% सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी तथा कुल आरक्षित सीटों का भी 50% सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगा।
- इस प्रकार आरक्षित की गई सीटों की अवधि सामान्य निर्वाचन की अवधि के बराबर होगी तथा महिलाओं के लिए 1 सामान्य निर्वाचन की अवधि के बराबर होगी‌।
# कौन सी सीट किसके लिए आरक्षित होगी इसका निर्णय राज्य सरकार के अधिकृत अधिकारी द्वारा लाॅटरी निकालकर किया जाता है। सामान्यतः यह कलेक्टर ही होता है।

* अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का निर्वाचन -
- जिला पंचायत के सदस्यों के निर्वाचन के पश्चात कलेक्टर के द्वारा जल्द से जल्द निर्वाचित सदस्यों का सम्मेलन बुलाया जाएगा जिसमें निर्वाचित सदस्य अपने बीच में से ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करेगी।

* अध्यक्ष के पद हेतु आरक्षण (जिला पंचायत) -
- यहाँ लाटरी राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा निकाला जाएगा।
- जिला पंचायत अध्यक्ष पद हेतु राज्य में कुल जनसंख्या के आधार पर पदों का आरक्षण किया जाएगा। राज्य में जितनी प्रतिशत जनसंख्या SC की होगी उतना प्रतिशत पदों का आरक्षण SC के लिए आरक्षित होगा।
- राज्य में जितनी प्रतिशत जनसंख्या ST का होगा उतने प्रतिशत पदों का आरक्षण ST के लिए आरक्षित होगा।
- अगर ST और SC के कुल पद 50% या कम हो तो OBC के लिए 25% पदों का आरक्षण किया जाएगा।
- आरक्षित किए गये कुल पदों का 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा तथा कुल पदों का भी 30% पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा।
- अध्यक्ष का पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा इसका निर्णय राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी द्वारा निकालकर किया जाएगा।
- इस प्रकार आरक्षित की गई पदों की अवधि दो सामान्य निर्वाचन की अवधि के बराबर तथा महिलाओं के लिए 1 सामान्य निर्वाचन अवधि के बराबर आरक्षित किया जाएगा।

* नामों का प्रकाशन
- सदस्य, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के निर्वाचन के पश्चात कलेक्टर के द्वारा इनके नामों का प्रकाशन किया जाएगा।

* जिला पंचायत का प्रथम सम्मेलन और पदावधि -
- जिला पंचायत का प्रथम सम्मेलन उनके नाम प्रकाशन होने की तिथि से 30 दिन के भीतर जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बुलाएगा‌। और जिला पंचायत उस प्रथम सम्मेलन की तारीख से 5 वर्ष तक के लिए कार्य करेगी अगर वह बीच में विघटित नहीं हो जाती।

* जिला पंचायत का विघटन -
- अगर कोई जिला पंचायत राज्य सरकार के निर्देशों का पालन नहीं करते या अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं करते तो राज्य सरकार या संचालक पंचायत जिला पंचायत को विघटित कर सकते हैं। सामान्यतः जिला पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। अगर कोई जिला पंचायत समय से पूर्व विघटित कर दी जाती है तो 6 माह के भीतर वहाँ नये चुनाव करवाए जाएंगे। इस प्रकार गठित जिला पंचायत का कार्यकाल इतना ही होगा जितनी पुरानी जिला पंचायत का बचा था।
- जिला पंचायत के विघटन होने पर नये चुनाव 6 माह के भीतर होते हैं। तो उस 6 महीने में प्रशासनिक समिति जिला पंचायत के कार्य को संभालेगी। इनमें वही सदस्य शामिल होंगे जो विघटन के समय जिला पंचायत के सदस्य थे। ( निर्वाचन और पदेन) दोनों होंगे।
# प्रशासनिक समिति स्थायी होता है।

* जिला पंचायत के अध्यक्ष उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव -
- जिला पंचायत के कुल निर्वाचित सदस्यों के 1/3 निर्वाचित सदस्य संचालक पंचायत से लिखित मांग करेंगे। और संचालक पंचायत उन सदस्यों को एक पावती देगा जिसमें एक तारीख लिखी होगी।
- इसी तारीख से 15 दिन के भीतर जिला पंचायत का एक विशेष सम्मेलन बुलाया जाएगा।
- सम्मेलन किस तारीख को होगी इसकी सूचना संचालक पंचायत 7 दिन के पूर्व CEO को देगा तथा CEO यह सूचना सदस्यों को भेजेगा।
- इस सम्मेलन की अध्यक्षता कौन करेगा इसकी सूचना संचालक पंचायत द्वारा 3 दिन पूर्व उस जिला पंचायत के CEO तथा कलेक्टर को भेजा जाएगा।
- इस सम्मेलन की अध्यक्षता कलेक्टर या अपर कलेक्टर पद श्रेणी का अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
- सम्मेलन की शुरूआत में अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति इस प्रस्ताव के पक्ष में रहने वाले किसी एक सदस्य को खड़े होकर इस प्रस्ताव को सुनाने के लिए बोलेगा और उसके पश्चात् मतदान की प्रक्रिया शुरू होगी।
- अगर किसी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है तो उसे प्रस्ताव पारित होने के 15 दिन के भीतर राज्य सरकार के पास अपील करनी होगी। राज्य सरकार प्रस्ताव प्राप्त होने के 45 दिन के भीतर निर्णय लेगी जो कि अंतिम होगा।
- यह मतदान गुप्त मतदान होगा।
- अगर उपस्थित और मत देने वाले 3/4 सदस्यों का बहुमत तत्समय जिला पंचायत का गठन करने वाले कुल निर्वाचित सदस्यों के 2/3 बहुमत से अधिक हो तो अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को अपना पद छोड़ना पड़ेगा।


जनपद पंचायत -

जनपद पंचायत की संरचना -
* प्रत्येक जनपद पंचायत निम्न से मिलकर बनेगी -
- निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचित सदस्य (वार्ड)
- राज्य विधानसभा के ऐसे सदस्य जिनका निर्वाचन क्षेत्र उस जनपद पंचायत में आता हो और वह क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र हो तो वह विधायक जनपद पंचायत का सदस्य बनेगा जो कि एक पदेन सदस्य है।
- जनपद पंचायत के भीतर आने वाली ग्राम पंचायत के सरपंच भी जनपद पंचायत के पदेन सदस्य होंगे। परंतु उस जनपद पंचायत में आने वाले कुल सरपंचों के 20% (1/5) सरपंच लाॅटरी द्वारा एक-एक वर्ष के लिए जनपद पंचायत के सदस्य बनेंगे।

# एक बार जो सरपंच जनपद पंचायत का सदस्य बन जाता है तो वह उस जनपद पंचायत की सामान्य अवधि में दुबारा उसका सदस्य नहीं बन सकता।

* जनपद पंचायत का वार्डों में विभाजन -
( न्यूनतम- 10 वार्ड , अधिकतम - 25 वार्ड )
- राज्य सरकार कलेक्टर के माध्यम से अधिसूचना जारी करके किसी टजनपद पंचायत को वार्डों में विभाजित करेगी। किसी जनपद पंचायत में न्यूनतम 10 वार्ड होंगे परंतु जिस जनपद की जनसंख्या 50000 से अधिक है तो वहाँ अधिकतम 25 वार्ड हो सकते हैं।
- वार्डों का विभाजन इस प्रकार किया जाएगा कि प्रत्येक वार्ड की जनसंख्या लगभग एक समान हो।
- प्रत्येक वार्ड एक सदस्यीय वार्ड होगा। अगर कोई वार्ड किसी सदस्य का निर्वाचन नहीं करता तो उस सदस्य का निर्वाचन लंबित होने के कारण आगे की कार्यवाई रोकी नहीं जाएगी। वहाँ 6 महीने के भीतर पुन: चुनाव करवाए जाएंगे अगर फिर वह सदस्य का निर्वाचन नहीं होता तो वहां तब तक चुनाव नहीं करवाए जाएंगे जब तक राज्य निर्वाचन आयोग को ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वहाँ चुनाव करवाए जाएं।

* वार्डों में आरक्षण -
- प्रत्येक जनपद पंचायत में निर्वाचित सदस्यों का पद SC, ST या OBC के लिए आरक्षित होगा। जनपद पंचायत में उनकी जनसंख्या के आधार पर पदों का आरक्षण किया जाएगा। किसी जनपद के अंदर जितनी प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति की होगी उतना प्रतिशत आरक्षण अनुसूचित जाति का होगा तथा जितनी प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की होगी उतना प्रतिशत आरक्षण अनुसूचित जनजाति का होगा। अगर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 50% या उससे कम हो तो अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 25% आरक्षण होगा।
- आरक्षित किए गये स्थानों का 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित होगा तथा कुल पदों का भी 50% पद महिलाओं के लिए आरक्षित होगा।
- कौन से वार्ड का सदस्य कौन से वर्ग के लिए आरक्षित होगा इसका निर्णय कलेक्टर द्वारा लाॅटरी निकालकर किया जाएगा।
- आरक्षण की यह अवधि दो सामान्य निर्वाचन की अवधि के बराबर तथा महिलाओं के लिए तीन सामान्य निर्वाचन की अवधि के बराबर होगी।

* जनपद पंचायत के अध्यक्ष का आरक्षण -
- अगर अध्यक्ष का पद ST, SC, OBC के लिए आरक्षित नहीं है तो उपाध्यक्ष उसी वर्ग का होना चाहिए।
- अध्यक्ष पद के लिए जिला पंचायत में उनकी जनसंख्या के आधार पर पदों का आरक्षण किया जाएगा। किसी जनपद पंचायत में जितनी प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति या जनजाति का होगा उतना प्रतिशत पदों का आरक्षण अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षित होगा‌।
- अध्यक्ष का पद जिसका होगा इसका निर्णय कलेक्टर द्वारा लाॅटरी निकालकर किया जाएगा। यह आरक्षण की अवधि दो सामान्य दो सामान्य निर्वाचन की अवधि तथा महिलाओं के लिए यह 1 सामान्य निर्वाचन अवधि के बराबर होगी।

* अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के निर्वाचन के लिए सम्मेलन -
- उपखण्ड अधिकारी राजस्व सदस्यों का निर्वाचन होते ही जल्द से जल्द जनपद पंचायत का एक सम्मेलन बुलाएगा और इस सम्मेलन में जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्य अपने बीच में से ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन करेंगे।

* नामों का प्रकाशन -
- सदस्य, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन के पश्चात् जिला उपसंचालक/जिला संयुक्त संचालक इन सदस्यों के नामों का प्रकाशन करेगा।

* जनपद पंचायत का प्रथम सम्मेलन -
- नामों के प्रकाशन होते ही 30 दिनों के भीतर जनपद पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत का सम्मेलन बुलाएगा और इस प्रथम सम्मेलन की तारीख से वह जनपद पंचायत 5 वर्ष के कार्यकाल के लिए बनेगी। ( अगर विवाहित न हो जाए)
- अगर जनपद पंचायत समय से पहले विवाहित हो जाती है तो नई जनपद पंचायत उतने दिन के लिए ही कार्य करेगी जितना पूर्व जनपद पंचायत का बचा था।

# अगर जनपद पंचायत विघटित हो जाती है तो नई जनपद पंचायत का चुनाव 6 माह के भीतर किया जाएगा।

* जनपद पंचायत का विघटन -
- अगर जनपद पंचायत अपने कार्यों को ठीक से नहीं करती या सरकार के आदेशों का पालन नहीं करती तो राज्य सरकार या संचालक पंचायत जाँच के पश्चात जनपद पंचायत को विघटित कर सकता है। इस विघटन के समय पर एक प्रशासनिक समिति कार्य करेगी। उस प्रशासनिक समिति के सदस्य वही होंगे जो जनपद पंचायत के विघटन के समय सदस्य थे।

# जनपद पंचायत के पदेन सदस्य भी इस प्रशासनिक समिति में भाग लेंगे‌।


* जनपद पंचायत के अध्यक्ष उपाध्यक्ष के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव -
- जनपद पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष किसी के भी खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना हो तो उस जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्यों के 1/3 सदस्य कलेक्टर से लिखित मांग करेंगे।
- कलेक्टर मांग प्राप्त होते ही उन सदस्यों को एक पावती देगा जिसमें मांग प्राप्त होने की तारीख लिखी होगी और उसी तारीख से 15 दिन के भीतर कलेक्टर द्वारा जनपद पंचायत का विशेष सम्मेलन बुलाया जाएगा।
- सम्मेलन की तारीख से 7 दिन पूर्व इसकी तुलना जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेजी जाएगी। और वह इस सूचना को जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्यों को भेजेगा।
- इस सम्मेलन की अध्यक्षता कौन करेगा इसका निर्णय कलेक्टर करेगा और सम्मेलन के 3 दिन पूर्व उसकी सूचना जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को देगा। इस सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति डिप्टी कलेक्टर से निम्न श्रेणी पद का व्यक्ति होगा।
- सम्मेलन के दिन अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति किसी एक निर्वाचित सदस्य को इस प्रस्ताव के पक्ष में बोलने को कहेगा और इसके पश्चात अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
- होने वाला मतदान गुप्त मतदान होगा।
- अगर उपस्थित और मत देने वाले 3/4 सदस्यों का बहुमत तत्समय जनपद पंचायत का गठन करने वाले कुल निर्वाचित सदस्यों के 2/3 से अधिक हो तो अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को अपना पद छोड़ना पड़ेगा।


* अविश्वास प्रस्ताव कब लाया जा सकता है -
- उस तारीख से जिस तारीख को अध्यक्ष या उपाध्यक्ष ने अपना पद ग्रहण किया है उसके 1 वर्ष के भीतर यह प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
- अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के कार्यकाल के अंतिम 6 माह में यह प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
- उस तारीख को जिसमें पिछला अविश्वास प्रस्ताव नामंजूर किया गया था उसके 1 वर्ष के भीतर पुनः अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।

* अपील कहाँ की जा सकती है -
- अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के विरूद्ध यह प्रस्ताव पारित होने पर प्रस्ताव पारित होने के 10 दिन के भीतर यह अपील सहायक पंचायत के पास की जा सकती है।
- संचालक पंचायत अपील प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर निर्णय लेगा जो कि अंतिम होगा।



* पंचायतों की संरचना -

* त्यागपत्र-

- ग्राम पंचायत का पंच अपना त्यागपत्र सरपंच को देगा।
- ग्राम पंचायत का सरपंच/उपसरपंच अपना त्यागपत्र जिला संयुक्त संचालक/उपसंचालक को देगा।
- जनपद पंचायत के सदस्य अपना त्यागपत्र जनपद पंचायत के अध्यक्ष को देगा‌।
- जनपद पंचायत अध्यक्ष/उपाध्यक्ष अपना त्यागपत्र कलेक्टर अतिरिक्त कलेक्टर को देगा‌।
- जिला पंचायत के सदस्य जिला पंचायत के अध्यक्ष को त्याग पत्र देगा।
- जिला पंचायत के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष त्यागपत्र कलेक्टर को देंगे।

* पंचायत के पदधारी हेतु निर्हरताएं/अयोग्यता :-
कोई व्यक्ति किसी पंचायत का पक्षधारी होने का पात्र नहीं होगा यदि -
- सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम-1935 के तहत दोषी पाया गया हो। और उसे दोषी करार दिए हुए 5 वर्ष की अवधि नहीं हुई हो।
- अगर किसी व्यक्ति को नार्कोटिक्स के उपयोग या विक्रय करने का दोषी पाया गया हो और उसे दोषी सिध्द होने पर 5 वर्ष का समय नहीं बिताया हो तो वह व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता।
- अगर किसी व्यक्ति को किसी अपराध का दोषी पाया गया है जिसमें सजा भारतीय दण्ड संहिता के प्रयोग से दी जाती है और उस अपराध में उसे कम से कम 6 माह की सजा होती है तो वह जेल से रिहा होने की तारीख से 5 वर्ष तक चुनाव लड़ नहीं सकता।
- जो व्यक्ति दिवालिया घोषित कर दिया गया हो तो व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता।
- कोई व्यक्ति जो लाभ का पद धारण करता हो तो वह पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता।
- कोई व्यक्ति जो केन्द्र या राज्य सरकार के अधीन किसी संख्या में कार्यरत हो और भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण उसे पद से निकाल दिया गया हो तो वह व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता।
- जो व्यक्ति विकृत चित्त का हो और न्यायालय द्वारा यह घोषित किया गया हो‌।
- जो व्यक्ति विदेश की नागरिकता धारण कर लिया हो।
- उसकी उम्र 21 साल न हो।
- जो किसी मान्यता प्राप्त संस्था से - 1. पंच पद के लिए 5वीं पास न हो। 2. पंच से ऊपर पद के लिए 8वीं पास न हो।
(सरपंच/जनपद सदस्य/जिला सदस्य)
यह प्रावधान उस संशोधन से लागू होने के पूर्व निर्वाचित पदाधिकारियों में लागू नहीं होगा। ( पंचायती राज संशोधन अधिनियम में यह संशोधन 2016 में हुआ था।)
- चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी के घर में जलवाहित शौचालय होना चाहिए।
- अगर किसी व्यक्ति में किसी पंचायत या शासकीय भूमि का अतिक्रमण किया हो तो वह पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता।

* पद धारण करने के बाद निर्हरताओं का दोषी पाया जाना -
- यदि कोई व्यक्ति जो पंचायत के पदधारी के रूप में निर्वाचन हुआ है और ऊपर बताए गये किसी निर्हरता का दोषी पाया जाता है तो ग्राम पंचायत के मामले में कलेक्टर के द्वारा जाँच कराने के बाद उसे पद से हटाया जा सकता है।
- जनपद पंचायत के मामले में कलेक्टर के द्वारा जाँच के पश्चात उसे पद से हटाया जा सकता है।
- जिला पंचायत के मामले में संचालक पंचायत के द्वारा जांच के पश्चात उसे पद से हटाया जा सकता है।
- अगर वह व्यक्ति इस निर्णय के विरूध्द अपील करना चाहता है तो ग्राम पंचायत के मामले में कलेक्टर द्वारा दिये गये निर्णय की तारीख से 30 दिन के भीतर वह संचालक पंचायत के पास अपील कर सकता है।
- जनपद पंचायत के मामले में कलेक्टर के निर्णय के 30 दिन के भीतर संचालक पंचायत के पास अपील की जा सकती है।
- जिला पंचायत के मामले में संचालक पंचायत के विरूध्द निर्णय के 30 दिन के भीतर राजस्व मण्डल में भी अपील की जा सकती है।
- संचालक पंचायत राजस्व मंडल अपील प्राप्त होने के बाद इस विषय पर निर्णय लेगा और वह निर्णय अंतिम होगा।

* पंचायत पदधारी का निलंबन -
अगर किसी पंचायत पदधारी ने किसी खाद्य सामग्री, औषधि अपमिश्रण, स्त्रियों व बालको के संबंध में अनैतिक व्यापार या भ्रष्टाचार से संबंधित कोई आरोप उन पर लगाया जाता है तो -
- ग्राम पंचायत के मामले में उपखण्ड अधिकारी राजस्व उस पदधारी को तत्काल पद से निलंबित करेगा।
- जनपद पंचायत के मामले में कलेक्टर अतिरिक्त कलेक्टर उस व्यक्ति को पद से निलंबित करेगा।
- जिला पंचायत के मामले में कलेक्टर द्वारा निलंबित करेगा।

* निलंबन आदेश की रिपोर्ट संबंधित अधिकारी को राज्य सरकार को 10 दिन के भीतर भेजेगा। राज्य सरकार इस रिपोर्ट के प्राप्त होने के तारीख से 90 दिन के भीतर निलंबन आदेश पर निर्णय लेगी। अगर राज्य सरकार 90 दिन के भीतर कोई निर्णय नहीं लेती तो यह निलंबन आदेश निरस्त हो जाएगा।
* अगर ग्राम पंचायत के सरपंच का पद निलंबन के कारण खाली हो जाता है तो ग्राम पंचायत का सचिव 15 दिनों के भीतर (निलंबन आदेश) ग्राम पंचायत का एक सम्मेलन बुलाएगा जिसमें ग्राम पंचायत के सभी पंच अपने बीच में से अस्थाई अवधि के लिए स्थानापन्न सरपंच को चुनेंगे।
* जनपद/जिला पंचायत के अध्यक्ष को अगर उसके पद से निलंबित कर दिया जाए तो जनपद/जिला का CEO निलंबन आदेश के 15 दिनों के भीतर जनपद/जिला पंचायत का सम्मेलन बुलाएगा जिसमें सभी निर्वाचित सदस्य अपने बीच में से एक कार्यवाहक अध्यक्ष को चुनेंगे।
- यदि सरपंच/अध्यक्ष का पद SC,ST व OBC के लिए आरक्षित था तो स्थानापन्न/कार्यवाहक अध्यक्ष उसी आरक्षित वर्ग का होना चाहिए।

* एक से अधिक पद धारण करने का निषेध/वर्जन -
- कोई ऐसा व्यक्ति जो पंचायत के एक से अधिक पदों पर निर्वाचित हो जाता है तो उस तारीख से जिस तारीख से वह निर्वाचित हुआ है उसके 10 दिनों के भीतर वह कलेक्टर/अतिरिक्त कलेक्टर को सूचित करेगा कि वह पंचायत के किस पद पर रहना चाहता है।
- अगर वह व्यक्ति कलेक्टर/अतिरिक्त कलेक्टर को सूचित किए बिना इन 10 दिनों की अवधि में किसी भी पंचायत के सम्मेलन में हाजिर हो जाता है तो ऐसा माना जाएगा कि उसने उस पंचायत के पद को चुन लिया है‌।
- अगर वह व्यक्ति 10 दिनों के भीतर निर्णय नहीं लेता और न ही किसी पंचायत के सम्मेलन में हिस्सा लेता है तो ऐसी स्थिति में पंचायत के पदों के वरीयता क्रम में उसे बड़ा पद मिलेगा।
- वरीयता क्रम - जिला पंचायत >जनपद पंचायत >सरपंच >पंच
- अगर पंचायत चुनाव अलग अलग समय में हुआ है तो वह तारीख जिसमें वह दूसरे पद में जीत हासिल किया है तो उस तारीख से 10 दिनों की गणना की जाएगी।

* पंचायतों का सम्मेलन -
* सम्मेलन की प्रक्रिया -
- ग्राम पंचायत का सरपंच प्रत्येक माह कम से कम एक बार ग्राम पंचायत का सम्मेलन बुलाएगा।
- अगर सरपंच किसी कारणवश सम्मेलन बुलाने में असमर्थ है तो और पिछले सम्मेलन की तारीख से 25 दिन निकल गये हो तो ग्राम पंचायत कट सचिव सम्मेलन बुलाएगा।
- ग्राम पंचायत के सम्मेलन की गणपूर्ति/कोरम/वाहक संख्या ग्राम पंचायत के कुल सदस्यों के आधे से होगी। (सरपंच सहित)
- अगर ग्राम पंचायत में गणपूर्ति नहीं होती है तो अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति सम्मेलन को स्थगित कर देगा और सम्मेलन की अगली बैठक कब होगी उसकी तारीख तय करेगा। उस सूचना को ग्राम पंचायत के मुख्यालय में चिपकाया जाएगा। इस प्रकार स्थगित सम्मेलन में गणपूर्ति होना आवश्यक नहीं है।
- परंतु गणपूर्ति नहीं होने पर कोई नया विषय चर्चा में नहीं लाया जा सकता है‌। यदि ग्राम पंचायत के 50% से अधिक सदस्य ग्राम पंचायत के विशेष सम्मेलन की मांग करते है तो मांग प्राप्त होने के 7 दिन के भीतर ग्राम पंचायत का सरपंच विशेष सम्मेलन बुलाएगा।
- अगर सरपंच 7 दि‌न की अवधि पूर्ण होने तक सम्मेलन नहीं बुला पाता है तो जिन्होंने सम्मेलन की लिखित माँग की है वह स्वयं ही सम्मेलन को बुला लेंगे और उस सम्मेलन की सूचना सचिव के द्वारा जारी की जाएगी।
- ग्राम पंचायत के विगत सम्मेलन तथा चालू सम्मेलन के बीच के काल अवधि के आय व्यय की रिपोर्ट ग्राम पंचायत के चालू सम्मेलन में रखी जाएगी।
- किसी जिला/जनपद पंचायत का सम्मेलन प्रत्येक माह कम से कम एक बार होगा। यह सम्मेलन अध्यक्ष के द्वारा बुलाया जाएगा अगर अध्यक्ष किसी कारणवश सम्मेलन बुलाने में असमर्थ हो जाते हैं तो पिछले सम्मेलन के 25 दिन पूर्ण होते ही जिला/जनपद पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी(CEO) इस सम्मेलन की सूचना जारी करेगा।
जनपद/जिला पंचायत की गणपूर्ति संबंधित पंचायत का गठन करने वाले कुल सदस्य(निर्वाचित पदों के 1/3 से होगी)
- जनपद/जिला पंचायत के आय व्यय की रिपोर्ट प्रत्येक 3 माह में एक बार रखी जाएगी‌।
- यह आय व्यय की रिपोर्ट ग्राम पंचायत में सचिव के द्वारा जबकि जनपद/जिला पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा रखी जाएगी।
- यदि जनपद/जिला पंचायत के 50% से अधिक सदस्य संबंधित पंचायत के विशेष सम्मेलन की माँग करते हैं तो संबंधित पंचायत का अध्यक्ष 7 दिनों कर भीतर पंचायत का विशेष सम्मेलन बुलाएगा। अगर वह 7 दिनों के भीतर विशेष सम्मेलन नहीं बुला पाता है तो जिन सदस्यों ने इस सम्मेलन की मांग की है वह इस सम्मेलन को बुलाएंगे।
और इस सम्मेलन की सूचना मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा की जाएगी। अगर जनपद/जिला पंचायत का अध्यक्ष या ग्राम पंचायत का सरपंच 3 बार सम्मेलन बुलाने में असमर्थ होता है तो उसे पद से हटाने की कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी।

* पंचायत के पदाधिकारियों को पद से हटाया जाना -